Detailed Notes on यह लिखकर जेब में रख ले किसी मंत्र की जरूरत नहीं +91-9779942279




राहुल जी के यात्रा-साहित्यकी विशेषता है उनकी वर्णन-शैली, जो इतनी आकर्षक है कि पाठक पुस्तक पढते समय यही अनुभव करता है कि वह भी लेखक के साथ-साथ भ्रमण कर रहा है । लेखक की दूसरी विशेषता है उनकी सूक्ष्म पर्यवेक्षकीय दृष्टि, जिससे पाठक मंत्रमुग्ध हो जाता है ।

किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार राजी सेठ ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं :'उसका आकाश', 'तीसरी हथेली', 'अंधे मोड़ से आगे', 'पुल' , 'अमूर्त कुछ', 'तुम भी.

सजीव द्वारा स्वयं चुनी गई ‘दस प्रतिनिधि कहानियाँ' हैं- 'अपराध', 'टीस', 'प्रेत-मुक्ति' 'पुन्नी माटी', 'ऑपरेशन जोनाकी', 'प्रेरणास्रोत', 'सागर सीमांत', 'आरोहण', 'नस्ल' तथा 'मानपत्र' ।

प्रतिष्ठित कथाकार नरेन्द्र नागदेव हर कहानी के फलक पर अपने पूरे कलामय व्यक्तित्व के साथ मौजूद होते हैं, वह भी पूरी एकाग्रता के साथ, कहानी दर कहानी बदलती हुई तस्वीरों में एक स्थायी लय की तरह। उनकी कहानियों की संरचना में तीनों स्वर साथ-साथ चलते हैं—मूल्यों के अंकन की जिद, उनके विघटन का यथार्थ और इन्हें सतत देखती अंतरात्मा की आंख, जिसे कथाकार की केंद्रीय दृष्टि भी कहा जा सकता है।

इस सीरीज़ के अत्यंत महत्त्वपूर्ण कथाकार अखिलेश ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है वे हैं-चिट्ठी, शापग्रस्त, बायोडाटा, ऊसर, पाताल, मुहब्बत, जलडमरूमध्य, वजूद, शृंखला तथा अँधेरा । 

हमें विश्वास है कि इस सीरीज़ के माध्यम से पाठक सुविख्यात लेखक रवीन्द्र कालिया की प्रतिनिधि कहानियों को एक ही जिल्द में पाकर सुखद पाठकीय संतोष का अनुभव करेंगें ।

एड्स कोई छुआछूत की बीमारी नहीं है कि रोगी का पारिवारिक या कि सामाजिक बहिष्कार किया जाय जैसा कि पहले कुष्ठ रोगियों प्रति किया जाता था। वैसे कुष्ठ भी अब असाध्य नहीं रहा। इस सामाजिक नजरिए में बदलाव की जरूरत है। एड्स रोगी को घृणा नहीं आपका स्नेह चाहिए। एक साथ रहने, उठने-बैठने, भोजन करने, सामूहिक स्नान गृह/शौचालय में जाने, वस्त्रों के संप्रयोग से एड्स नहीं फैलता और न ही एक दफ्तर में साथ काम करने से या कि भीड़ भरे स्थानों में, रेल-बस में साथ-साथ सफल करने से। अतः आप एच.

‘पेड़ खाली नहीं है’ नरेन्द्र नागदेव की विगत आठ-दस वर्षों में प्रकाशित-चर्चित कहानियों का संग्रह है, जिसमें वे तमाम विशेषताएं विद्यमान हैं, जो उन्हें समकालीन साहित्य में एक विशिष्ट स्थान प्रदान करती हैं।

किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार मृदुला गर्ग  ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'ग्लेशियर से', 'टोपी' , 'शहर के नाम', 'उधार की हवा', 'वह मैं ही थी', 'उर्फ सैम', 'मंजूर-नामंजूर', 'इक्कीसवीं सदी का पेड़', 'वो दूसरी' तथा 'जूते का जोड़', 'गोभी का तोड़' ।

अचानक, सदगुरु check here भगवान दत्त के शरीर से एक तेजस्वी प्रकाश पुंज निकलकर पुनीताचारी जी के शरीर में समा गया । भगवान दत्तात्रेय ने अपना तेज, अपना ओज, अपनी आभा पुनीताचारी जी में प्रविष्ट कराकर पुनीताचारी जी को अपने समान ओजस्वी बना लिया । आज एक गुरु ने अपने शिष्य को सम आसन पर बैठा लिया । बारंबार नमनीय हैं ऐसे सदगुरु भगवान दतात्रेय महाराज और धन्य हैं ऐसे शिष्य पुनीताचारी जी महाराज ।

किताबघर प्रकाशन गौरवान्वित है कि इस सीरीज़ के लिए सभी कथाकारों का उसे सहज सहयोग मिला है। इस सीरीज़ के महत्त्वपूर्ण कथाकार राजेन्द्र राव ने प्रस्तुत संकलन में अपनी जिन दस कहानियों को प्रस्तुत किया है, वे हैं : 'उत्तराधिकार', 'लौकी का तेल', 'अमर नहीं यह प्यार', 'वैदिक हिंसा', 'बाकी इतिहास', 'घुसपेट', 'छिन्नमस्ता', 'असत्य के प्रयोग', 'शिफ्ट' तथा 'नौसिखिया'।

'नौ लघु नाटक' में समय-समय पर लिखे गए नौ लघु नाटक संग्रह के रूप में आ रहे हैं । प्रताप सहगल का नाट्य-लेखन परंपरा एवं प्रयोगशीलता के संतुलन बिंदु पर खडा नजर आता है । अपनी इसी छवि के अनुरूप उनके इन लघु नाटकों में भी कहीं परंपरा की गंध मिलेगी तो कहीं प्रयोगशीलता की ललक । कहीं मूल्यों का भंजक रूप मिलेगा तो कहीं चरित्रों कै भीतर सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक पेठ। इनमें से अनेक नाटक कई-कई बार मंचित हुए हैं और कई एक प्रकाशित होकर अपना पाठक वर्ग बना चुके हैं ।

गोविन्द मिश्र का यह बारहवाँ उपन्यास वृद्धावस्था के अकेलेपन और जिजीविषा के द्वन्द और टकराहट पर लिखा गया संभवतः हिंदी का पहला उपन्यास है।

इस परिपेक्ष्य में यह ग्रंथ नेताओं, प्रशासकों और आज के प्रबुद्ध पाठक-वर्ग के लिए विशेष स्फूर्तिप्रद होता हुआ भारत के नव-समाज-निर्माण के लिए दिशा-निर्देश करने में अनवरत उपयोगी सिद्ध होगा।

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